Gulzar Shayari in Hindi (Gulzar Best Shayari)

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Gulzar Shayari में गुलज़ार साहब शेरो-शायरी की दुनियाँ का वो कोहिनूर हीरा है। जिसकी चमक़ कभी फिकि नहीं पड़ती। और Gulzar Shayari भी उन्हीं की तरह अनमोल है।

Gulzar Shayari में दोस्तों अगर आप नेट पर Gulzar Shayari ढूंढ रहे हैं। तो हमारे पास सबसे Best Gulzar Shayari फ़ोटो सहित है। जो आप सभी को और कहीं नहीं मिलेगी।

रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे,
धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में…!!

गुलज़ार

हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में,
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया…!!

गुलज़ार

तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं,
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं…!!

गुलज़ार

उसी का ईमाँ बदल गया है,
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था…!!

गुलज़ार

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Gulzar-Shayari

बहुत अंदर तक जला देती है,
वो शिकायते जो बया नहीं होती…!!

गुलज़ार

वो एक दिन एक अजनबी को,
मेरी कहानी सुना रहा था…!!

गुलज़ार

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा…!!

गुलज़ार

ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है,
दर्द दिल का लिबास होता है…!!

गुलज़ार

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में,
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में…!!

गुलज़ार

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शाम से आँख में नमी सी है,
आज फिर आप की कमी सी है…!!

गुलज़ार

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है,
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है…!!

गुलज़ार

ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं,
दिल ने हर चीज़ पराई दी है…!!

गुलज़ार

दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है,
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में…!!

गुलज़ार

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते…!!

गुलज़ार

गुलाम थे तो हम सब हिंदुस्तानी थे,
आज़ादी ने हमे हिन्दू, मुसलमान बना दिया…!!

गुलज़ार

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बेहिसाब हसरते ना पालिये,
जो मिला हैं उसे सम्भालिये…!!

गुलज़ार

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था,
आज की दास्ताँ हमारी है…!!

गुलज़ार

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी थी,
उन की बात सुनी भी हम ने अपनी बात सुनाई भी…!!

गुलज़ार

आँखों के पोछने से लगा आग का पता,
यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ…!!

गुलज़ार

एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है,
मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की…!!

गुलज़ार

एक सन्नाटा दबे-पाँव गया हो जैसे,
दिल से इक ख़ौफ़ सा गुज़रा है बिछड़ जाने का…!!

गुलज़ार

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शोर की तो उम्र होती है,
ख़ामोशी तो सदाबहार होती है…!!

गुलज़ार

राख को भी कुरेद कर देखो,
अभी जलता हो कोई पल शायद…!!

गुलज़ार

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं,
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ…!!

गुलज़ार

काँच के पार तिरे हाथ नज़र आते हैं,
काश ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता…!!

गुलज़ार

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे…!!

गुलज़ार

गो बरसती नहीं सदा आँखें,
अब्र तो बारा मास होता है…!!

गुलज़ार

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वक़्त रहता नहीं कहीं थमकर,
इस की आदत भी आदमी सी है…!!

गुलज़ार

जब भी ये दिल उदास होता है,
जाने कौन आस-पास होता है…!!

गुलज़ार

जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ,
उस ने सदियों की जुदाई दी है…!!

गुलज़ार

अपने साए से चौंक जाते हैं,
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा…!!

गुलज़ार

चूल्हे नहीं जलाए कि बस्ती ही जल गई,
कुछ रोज़ हो गए हैं अब उठता नहीं धुआँ…!!

गुलज़ार

आग में क्या क्या जला है शब भर,
कितनी ख़ुश-रंग दिखाई दी है…!!

गुलज़ार

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रोज़ पिलाता हूँ एक ज़हर का पियाला उसे,
एक दर्द जो दिल में है मारता ही नहीं…!!

गुलज़ार

आप ने औरों से कहा सब कुछ,
हम से भी कुछ कभी कहीं कहते…!!

गुलज़ार

देर से गूँजते हैं सन्नाटे,
जैसे हम को पुकारता है कोई…!!

गुलज़ार

वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं…!!

गुलज़ार

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं…!!

गुलज़ार

कैसे करें हम ख़ुद को तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं तो तुम शर्ते बदल देते हो…!!

गुलज़ार

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आप के बाद हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है…!!

गुलज़ार

किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं…!!

गुलज़ार

तन्हाई की दीवारों पर,
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,
बेबसी की छत के नीचे,
कोई किसी को भूल रहा हैं…!!

गुलज़ार

दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं…!!

गुलज़ार

पलक से पानी गिरा है तो उसको गिरने दो,
कोई पुरानी तमन्ना पिंघल रही होगी…!!

गुलज़ार

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है पर गुज़ारा हो ही जाता है…!!

गुलज़ार

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आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई…!!

गुलज़ार

कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना…!!

गुलज़ार

यूँ भी इक बार तो होता कि समंदर बहता,
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता…!!

गुलज़ार

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई,
जैसे एहसान उतारता है कोई…!!

गुलज़ार

तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं,
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ भेजी हैं…!!

गुलज़ार

ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा,
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है…!!

गुलज़ार

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एहसान किसी का वो रखते नहीं, मेरा भी चुका दिया,
जितना खाया था नमक मेरा, मेरे जख्मों पे लगा दिया…!!

गुलज़ार

काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी,
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी…!!

गुलज़ार

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं,
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है…!!

गुलज़ार

उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जहाँ पर,
चले जहाँ से तो ये पेहरान उतार चले…!!

गुलज़ार

सहर न आई कई बार नींद से जागे,
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले…!!

गुलज़ार

कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया,
जब भी अपनी राह चलने की कोशिश की…!!

गुलज़ार

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मोहब्बत से फुरसत नहीं मिली,
वरना कर के बताते नफरत किसे कहते हैं…!!

गुलज़ार

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ,
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की…!!

गुलज़ार

कोई अटका हुआ है पल शायद,
वक़्त में पड़ गया है बल शायद…!!

गुलज़ार

किसी सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद,
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं…!!

गुलज़ार

तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं…!!

गुलज़ार

घर में अपनों से उतना ही रूठो,
कि आपकी बात और दूसरों की इज्जत,
दोनों बरक़रार रह सके…!!

गुलज़ार

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सहमा सहमा डरा सा रहता है,
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है…!!

गुलज़ार

कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें…!!

गुलज़ार

कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती,
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे…!!

गुलज़ार

शायर बनना बहुत आसान हैं,
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए…!!

गुलज़ार

ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ,
बस बच्चपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं…!!

गुलज़ार

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यूँ भी इक बार तो होता कि समंदर बहता,
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता…!!

गुलज़ार

कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैं,
ताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक…!!

गुलज़ार

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया…!!

गुलज़ार

कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं,
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता…!!

गुलज़ार

बिगड़ैल हैं ये यादे,
देर रात को टहलने निकलती हैं…!!

गुलज़ार

सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम,
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं…!!

गुलज़ार

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आ रही है जो चाप क़दमों की,
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद…!!

गुलज़ार

सुनो ज़रा रास्ता तो बताना,
मोहब्बत के सफ़र से वापसी है मेरी…!!

गुलज़ार

तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं,
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ भेजी हैं…!!

गुलज़ार

सहर न आई कई बार नींद से जागे,
थी रात-रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले…!!

गुलज़ार

वह जो सूरत पर सबकी हंसते हैं,
उनको तोहफे में एक आईना दीजिए…!!

गुलज़ार

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काई सी जम गई है आँखों पर,
सारा मंज़र हरा सा रहता है…!!

गुलज़ार

कुछ शिकायत बनी रहे तो बेहतर है,
चाशनी में डूबे रिश्ते वफादार नही होते…!!

गुलज़ार

कैसे गुजर रही है सब पूछते है,
कैसे गुजारता हूँ कोई नही पूछता …!!

गुलज़ार

तेरी तरह बेवफा निकले मेरे घर के आईने भी,
खुद को देखूँ तेरी तस्वीर नजर आती है…!!

गुलज़ार

सच को तमीज ही नही बात करने की,
झूठ को देखो कितना मीठा बोलता है…!!

गुलज़ार

कुछ ऐसे हो गए है इस दौर के रिश्ते,
आवाज अगर तुम ना दो तो बोलते वह भी नही…!!

गुलज़ार

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उसने कागज की कई कश्तिया पानी में उतारी,
और ये कह के बहा दी कि समंदर में मिलेंगे…!!

गुलज़ार

ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की,
और कहना कि कफ़न की ख्वाहिश में,
मेरी लाश उनके आँचल का इंतज़ार करती है…!!

गुलज़ार

चुप हो तो पत्थर ना समझना मुझे,
दिल पर असर हुआ है किसी अपने की बात का…!!

गुलज़ार

तुझसे कोई शिकवा शिकायत नही है,
जिंदगी तूने जो भी दिया है वही बहुत है…!!

गुलज़ार

बच्चपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला,
जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं…!!

गुलज़ार

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मैं दिया हूँ मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से है,
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ है…!!

गुलज़ार

वह चीज जिसे दिल कहते है,
हम भूल गए है रखकर कहीं…!!

गुलज़ार

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,
ऐसा तो कम ही होता है वह भी हो तन्हाई भी…!!

गुलज़ार

गुलाम थे तो हम सब हिंदुस्तानी थे,
आजादी ने हमें ️हिंदू मुसलमान बना दिया…!!

गुलज़ार

बहुत छाले है उसके पैरों में,
कमबख्त उसूलों पर चला होगा…!!

गुलज़ार

मैंने दबी आवाज़ में पूछा मुहब्बत करने लगी हो,
नज़रें झुका कर वो बोली बहुत…!!

गुलज़ार

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