Dard Bhari Shayari in Hindi (दर्द भरी शायरी)

Dard Bhari Shayari, Dard Bhari Shayari in Hindi

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Dard Bhari Shayari

दाद देते है हम तुम्हारे नजरअंदाज करने के हुनर को,
जिसने भी सिखाया है वो उस्ताद कमाल का होगा।

हर रात जान बूझकर रखता हूँ दरवाज़ा खुला…
शायद कोई लुटेरा मेरा गम भी लूट ले…

क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे…!!
तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है…!!

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Dard Bhari Shayari

अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई,
तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं।

मेरे दिल की उम्मीदों का हौसला तो देखो,
इंतज़ार उसका है जिसे मेरा एहसास तक नहीं…!!

हर मर्ज़ का इलाज़ मिलता था उस बाज़ार में,
मोहब्बत का नाम लिया दवाख़ाने बन्द हो गये…!!

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Dard Bhari Shayari

मोहब्बत ख़ूबसूरत होगी किसी और दुनिया में,
इधर तो हम पर जो गुज़री है हम ही जानते हैं।

वादो से बंधी जंजीर थी जो तोड दी मैने,
अब से जल्दी सोया करेंगें मोहब्बत छोड दी मैंने…!!

भुला दूंगा तुझे ज़रा सब्र तो कर,
तेरी तरह मतलबी बनने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही।

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Dard Bhari Shayari

रोज़ पिलाता हूँ एक ज़हर का प्याला उसे,
एक दर्द जो दिल में है, मरता ही नहीं है।

गम ने हंसने ना दिया, जमाने ने रोने ना दिया,
नींद आई तो तेरी यादों ने सोने न दिया।

काश! दिलो का भी कोई चुनावी मौसम आता,
ज़ज्बातों के गड्ढे पाँच साल में ही सही, भर तो जाते।

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शायरी में कहाँ सिमटता है दर्द-ए-दिल दोस्तो,
बहला रहे है खुद को जरा कागजों के साथ।

मुझको ढुँढ लेता है रोज किसी बहाने से,
दर्द वाकिफ हो गया हैँ मेरे हर ठिकाने से…!!

किसी ने यूँ ही पूछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है,
हमने हँसते हुए कहा, “पता नहीं… कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।

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नसीहत अच्छी देती है दुनिया,
अगर दर्द किसी ग़ैर का हो।

सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह…
उन सबके बीच तेरी कमी अपनी जगह…!!

ये उनकी मोहब्बत का नया दौर है,
कल तक जहाँ मै था, आज वहाँ कोई और है!

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ज़हर देता है कोई, कोई दवा देता है,
जो भी मिलता है मेरा दर्द बढ़ा देता है।

ये मेरा इश्क, औरों सा नहीं…
तन्हा रहूँगा.. फिर भी तेरा ही रहूँगा…!!

कल रात मैंने अपने सारे ग़म, कमरे की दीवार पर लिख डाले,
बस फिर हम सोते रहे और दीवारे रोती रही…!!

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किस दर्द को लिखते हो इतना डूब कर,
एक नया दर्द दे दिया है उसने ये पूछकर।

मैं ज़हर तो पी लूँ शौक से तेरी खातिर…
पर शर्त ये है कि तुम सामने बैठ कर साँसों को टुटता देखो!

मेरी लिखी किताब मेरे हाथों में थमा कर वो बोली,
इसे पढ़ लो मोहब्बत करना सीख जाओगे।

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दर्द मोहब्बत का ऐ दोस्त बहुत खूब होगा,
न चुभेगा.. न दिखेगा.. बस महसूस होगा।

एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया,
जितना खाया था नमक मेरा, मेरे जख्मों पर लगा दिया।

आज रास्ते में कुछ प्यार भरे पन्ने टुकड़ो में मिले,
शायद फिर किसी गरीब की मोहब्बत का तमाशा हो गया…!!

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खामोशियाँ कर देती बयां तो अलग बात है,
कुछ दर्द है जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते।

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है…
मुझे तेरी कमी महसूस होती है…

हमें भी शौक था दरिया-ऐ-इश्क में तैरने का,
एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला।

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सब सो गए अपना दर्द अपनों को सुना के,
कोई होता मेरा तो मुझे भी नींद आ जाती।

मुझे क़बूल है हर दर्द, हर तकलीफ़ तेरी चाहत में..
सिर्फ़ इतना बता दे, क्या तुझे मेरी मोहब्बत क़बूल है?

नफ़रत करना तो हमने कभी सीखा ही नहीं,
मैंने तो दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर।

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कभी सोचा न था के वो मुझे तनहा कर जायेगा,
जो अक्सर परेशां देख कर कहता था, मैं हूँ ना।

तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दर्द,
तू किसी रोज मेरे घर में उतर शाम के बाद।

बेताब हम भी थे दर्द जुदाई की कसम,
रोता वो भी होगा नज़रें चुरा चुरा कर।

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ये ना पूछ के शिकायतें कितनी है तुम से,
तो बता तेरा कोई और सितम बाकी तो नहीं।

ना कर तू इतनी कोशिशे, मेरे दर्द को समझने की,
पहले इश्क़ कर, फिर ज़ख्म खा, फिर लिख दवा मेरे दर्द की।

और भी कर देता है मेरे दर्द में इज़ाफ़ा,
तेरे रहते हुए गैरों का दिलासा देना।

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लोग कहते है हम मुस्कुराते बहुत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते।

जिस दिल पे चोट न आई कभी, वो दर्द किसी का क्या जाने,
खुद शम्मा को मालूम नहीं, क्यूँ जल जाते हैं परवाने।

वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत है,
देती थी नया जख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए।

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बिना उसके दिल का हाल कैसे बतलाऊ…!!
जैसे खाली बस्ता हो किसी नालायक बच्चे का…!!

हम ने कब माँगा है तुम से, अपनी वफ़ाओं का सिला,
बस दर्द देते रहा करो, मोहब्बत बढ़ती जाएगी।

बहुत अजीब सिलसिले है मोहब्बत इश्क मैं,
कोई वफ़ा के लिए रोया तो कोई वफ़ा कर के रोया।

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हम तेरे प्यार में कुछ ऐसा काम कर जायँगे…
लोग देखेंगे तुझे और याद हम आएंगे…!!

आज मेंने तलाश किया उसे अपने आप में,
वो मुझे हर जगह मिला मेरी तकदीर के सिवा।

झूठी हँसी से जख्म और बढ़ता गया,
इससे बेहतर था खुलकर रो लिए होते।

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अगर “बेवफाओं” की अलग ही दुनिया होती,
तो मेरी वाली वहाँ की “रानी” होती..!!

मेरा ख्याल जहन से मिटा भी न सकोगे,
एक बार जो तुम मेरे गम से मिलोगे,
तो सारी उम्र मुस्करा न सकोगे।

तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है, जिसका रास्ता बहुत खराब है,
मेरे ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा, दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है।

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एक खेल रत्न उसको भी दे दो,
बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से।

दर्द दे गए सितम भी दे गए, ज़ख़्म के साथ वो मरहम भी दे गए,
दो लफ़्ज़ों से कर गए अपना मन हल्का,
और हमें कभी ना रोने की कसम दे गए।

बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की,
कोई किसी को टूट कर चाहता है,
और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।

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ख़ुदकुशी हराम है साहब,
मेरी मानो तो इश्क़ कर लो…!!

लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर,
मैंने दर्द की अपने नुमाईश न की,
जब जहाँ जो मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की।

ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं,
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं,
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको,
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है।

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उनकी नज़रो में फर्क अब भी नहीं है,
पहले मुड़ के देखते थे, और अब देख के मुड़ जाते है…!!

हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे,
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे,
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया,
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।

वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे,
हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे,
और हमें बेवफ़ा का नाम मिला,
क्योंकि हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।